आधयात्मिक मूल्यों के लिए समर्पित सामाजिक सरोकारों की साहित्यिक पत्रिका.

Monday, March 9, 2009

परमात्मा के शिशु

इस विशाल विश्वमें तुम कितने नन्हे-से शिशु हो, इस पर विचार करो। क्या तुम्हारी बुद्धि, छोटी-छोटी चीजोंके लिये मचल पड़ने वाली बुद्धि तुम्हारे सम्पूर्ण जीवनका हिताहित सोंच सकती है? यदि नहीं तो परमात्माके अनन्त ग्यान, शक्ति और कृपापर क्यों नहीं निर्भर हो जाते?

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