आधयात्मिक मूल्यों के लिए समर्पित सामाजिक सरोकारों की साहित्यिक पत्रिका.

Saturday, July 5, 2008

संपादक की कलम से .......

रुद्र संदेश का यह बारहवाँ अंक आपके हाथों में है। इस महीने की अठारहवीं तारीख को गुरु पूर्णिमा का महान पर्व भी है। इस एक वर्ष के दौरान हमने पत्रिका को अपने पाठकों की इच्छा के अनुरूप बनाए रखने का भरसक प्रयास किया है। इस प्रयास में हम कितने सफल रहे हैं, यह तो सुधी पाठक ही बता सकते हैं, लेकिन प्रतिदिन बढ़ती पत्रिका की सदस्य संख्या से सम्पादक मण्डल को लगता है कि उनका प्रयास सार्थक दिशा में जा रहा है। प्रस्तुत अंक गुरु अंक है। इसी को ध्यान में रखकर हमारे कला सम्पादक जी ने महाराजजी के श्रीचरणों का सुस्पष्ट चित्र लेकर उसे पत्रिका के आवरण पृष्ठ पर सजाया है। कहते हैं कि इहलोक और परलोक के समस्त वैभव गुरु की चरण रज के सामने तुच्छ हैं। महाराजश्री के चरणों में बना पद्म चिह्‌न स्वयं पत्रिका के आवरण को वैभव प्रदान कर रहा है। अंतिम पृष्ठ पर महाराजजी का सिंहासन पर बैठे हुए जो चित्र बनाया है, इसके लिए अनेक पाठकों की इच्छा को ध्यान में रखा गया है। गुरु पूर्णिमा पर्व के मास की पत्रिका के अंक में गुरु विषय को केन्द्र में रखकर उस पर विभिन्न धर्माचार्यों से एवं इंटरनैट के माध्यम से दुनियां के विभिन्न कोनों में बैठे अपने सुधी पाठकों से विचार आमंत्रित किए गए। जिनमें से कुछ प्रतिनिधि विचारों को हमने प्रस्तुत अंक में ठीक उसी प्रकार छापा है, जिस रूप में वे हमें प्राप्त हुए हैं। गुरु शिक्षा पर एक प्रेरक कहानी हमें इस मास में मिली जो वास्तव में हृदय स्पर्शी एवं प्र्रेरणाप्रद है, उसे भी बिना काटछाँट के स्थान दिया गया है। एक संत श्री द्वारा प्रेषित कहानी भी अत्यंत प्रेरणा प्रद है जो इस अंक में छपी है। पाठकों की इच्छा थी कि महाराजजी द्वारा विरचित श्रीमद्भागवत को भजनों सहित छापा जाए, इसीलिए प्रस्तुत अंक से यह परम्परा भी शुरु की है। इसके बारे में सुधी पाठकों से प्रतिक्रिया अपेक्षित है। प्रस्तुत अंक में हमने श्रीमद्भागवत्‌ गीता के दो श्लोकों का हिन्दी एवं अंग्रेजी में व्याख्यात्मक निरूपण किया है। ये दोनों श्लोक गुरु पर्व के कारण आवश्यक जान पड़े थे। वास्तु सम्मत विभिन्न जानकारियों, स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद, जिज्ञासा एवं समाधान, समाचार जगत सहित अन्य परम्परागत आलेखों को अपने में संजोए प्रस्तुत अंक कैसा बन पड़ा है, इसका आंकलन कर हमें लिखने की कृपा करें। डा. श्रीराम वर्मा के भारतीय दर्शन एवं परमाणुवाद विषयक आलेख की दूसरी कड़ी भी इस अंक में है। आशा है अगले अंक में यह आलेख पूरा हो जाएगा और निश्चित रूप से यह सिद्ध करने में सहायक है कि भारतीय दर्शन कितना वैज्ञानिक व प्रामाणिक है। महाराजश्री के आशीर्वाद से अभिसिंचित यह अंक आपके आध्यात्मिक उन्नयन में सहयोगी हो, इसी कामना के साथ................

3 comments:

छत्तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari said...

बढिया प्रयास है आपका, धन्यवाद । इस नये हिन्दी ब्लाग का स्वागत है ।
शुरूआती दिनों में वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें इससे टिप्पयणियों की संख्या‍ प्रभावित होती है
(लागईन - डेशबोर्ड - लेआउट - सेटिंग - कमेंट - Show word verification for comments? No)
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Sunjoy Bose said...

Hari Om,
sarahaniya hai aapka prayas.Prabhu se prarthna hai ki aapko aapke lakshya ki praapti me sahayata karen.
Aapne kahin apna pata nahi diya jis par yadi hum chaahen to lekh bhej saken.

Yogesh Kumar said...

Om Shanti
Bahut achcha lag rahaa hai ki Rudra Sandesh logo tak har raste se pahuch rahaa hai. Yadi aap ek toh blog mai lekh bhejne aur patrika ke subscription ke liye kahi koi address box banaye, Second aapne ek community bhi banayi hai jismai is blog ka URL nahi diya hai, Third yadi aap aapni community ka name Rudra Sandesh ya aur kuchh kare toh mujhe lagta hai ki ye better hoga.